बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों और जरूरतमंदों की मदद के लिए ‘Sood Charity Foundation’ (SCF) की स्थापना की। इस पहल ने उन्हें समाज में ‘गरीबों के मसीहा’ के रूप में स्थापित किया। Foundation ने अब तक लाखों लोगों को भोजन, चिकित्सा सहायता, शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराया। 4 मिलियन से अधिक भोजन वितरित किए गए, 90,000 से अधिक प्रवासी मजदूरों को मदद मिली, 300 से ज्यादा ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए, 150 छात्रों को उच्च शिक्षा में सहायता दी गई, 400 से अधिक डायलिसिस सत्र आयोजित किए गए और 300 हृदय सर्जरी में मदद की गई। हालांकि,

Foundation की सफलता के बावजूद विवाद भी सामने आए। आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि SCF ने 18.94 करोड़ रुपए का चंदा एकत्र किया, लेकिन केवल 1.90 करोड़ रुपए राहत कार्यों में खर्च किए गए। इसके अलावा, SCF ने 2.10 करोड़ रुपए विदेशी स्रोतों से प्राप्त किए, जो FCRA नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। इन आरोपों के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में Foundation पर घोटाले का आरोप भी लगाया गया। सोनू सूद ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि सभी चंदे का उपयोग मानवता की सेवा में किया गया और पूरी पारदर्शिता बरती गई। सितंबर 2025 में, सोनू सूद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप ‘1xBet’ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए तलब किया। यह जांच यह देखने के लिए की जा रही है कि कैसे कुछ हस्तियों को इस ऐप से जोड़ा गया और फंड का उपयोग कैसे हुआ।
फिल्मी दुनिया में भी सोनू सूद सक्रिय हैं। उन्होंने अपनी फिल्म ‘फतेह’ से निर्देशन की शुरुआत की और घोषणा की कि फिल्म की बॉक्स ऑफिस कमाई का एक हिस्सा वृद्धाश्रमों और अनाथालयों को दान किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी में निवेश भी किया है। सोनू सूद की चैरिटी पहल ने निश्चित रूप से लाखों लोगों की मदद की है, लेकिन वित्तीय विवाद और कानूनी जांच ने उनके काम के चारों ओर सवाल भी पैदा किए हैं। ऐसे में उनकी छवि एक तरफ सामाजिक सेवक की है और दूसरी तरफ विवादों में फंसे अभिनेता की






