नई दिल्ली: पिछले कुछ हफ्तों में रिकॉर्ड ऊँचाइयों को छूने के बाद, भारतीय सर्राफा बाजार (Bullion Market) में सोने और चांदी की कीमतों में अचानक और भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट इतनी तेज़ है कि सिर्फ 7 से 10 दिनों की अवधि में ही चांदी ₹20,000 से ₹28,000 प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई है, जबकि सोने की कीमतों में भी बड़ी कमी आई है। खरीददारों के लिए यह एक शानदार मौका माना जा रहा है।चांदी में आई सबसे बड़ी गिरावट चांदी की कीमतों में आई गिरावट सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है। गिरावट का आंकड़ा: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत अपने उच्चतम स्तर ₹1,70,000 प्रति किलोग्राम के पार पहुँचने के बाद, 7 कारोबारी दिनों में ₹20,000 से अधिक सस्ती हो गई। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गिरावट ₹27,000 से ₹28,000 प्रति किलोग्राम तक पहुँच चुकी है।
सटीक तुलना: अक्टूबर के मध्य में ₹1,69,230 प्रति किलोग्राम पर बिक रही चांदी, अब ₹1,47,033 प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई है, जो हज़ारों रुपये की बड़ी कमी को दर्शाता है।
सोने की कीमतों में भी कमी
सोने की कीमतें भी रिकॉर्ड हाई (₹1,32,000 प्रति 10 ग्राम के करीब) से नीचे आ गई हैं। गिरावट का आंकड़ा: सोने की कीमतों में भी एक ही हफ्ते में ₹6,000 से ₹8,000 प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव (IBJA रेट) एक सप्ताह में ₹1,29,584 प्रति 10 ग्राम से गिरकर ₹1,21,518 प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया, जो ₹8,066 की कमी को दिखाता है।
गिरावट के मुख्य कारण
कीमती धातुओं (सोना और चांदी) की कीमतों में आई इस तेज गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं: मुनाफावसूली (Profit Booking): सोने और चांदी ने इस साल शानदार रिटर्न दिया है (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 60% से 80% तक)। रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुँचने के बाद, निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफा कमाना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ गई और कीमतें तेजी से नीचे आईं। अमेरिकी डॉलर में मजबूती: डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है। चूँकि सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में ट्रेड होते हैं, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के निवेशकों के लिए ये धातुएँ महंगी हो जाती हैं, जिससे उनकी मांग घट जाती है।
वैश्विक तनाव में कमी: कुछ वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों (जैसे मध्य-पूर्व का तनाव या अमेरिका-चीन व्यापार तनाव) में कमी आने या स्थिरता आने से निवेशक अब ‘सेफ हेवन’ (Safe Haven) माने जाने वाले सोने से अपनी पूंजी निकालकर ज्यादा जोखिम वाले (लेकिन अधिक रिटर्न वाले) एसेट्स में लगा रहे हैं।
मांग में कमी: दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों का सीज़न खत्म होने के बाद भौतिक सोने (Physical Gold) की मांग में भी थोड़ी कमी आई है, जिसने कीमतों पर दबाव बनाया है।
एक्सपर्ट्स की राय
कमोडिटी एक्सपर्ट्स इस गिरावट को बाज़ार में आए ज़रूरी सुधार (Correction) के तौर पर देख रहे हैं, न कि कोई बड़ा ट्रेंड रिवर्सल। उनका मानना है कि इतनी तेज़ रैली के बाद ‘प्रॉफिट बुकिंग’ होना सामान्य है। हालांकि, लंबे समय में वैश्विक अनिश्चितताओं और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी के चलते सोने और चांदी की कीमतें मजबूत बनी रह सकती हैं।
निष्कर्ष:
वर्तमान में आई यह गिरावट सोने और चांदी के खरीदारों के लिए एक अच्छा अवसर है, क्योंकि कीमतें अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ गई हैं।






